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गुरुवार, 17 सितंबर 2020

सितंबर 17, 2020

स्वास्थ्य पर अदरक का प्रभाव

   स्वास्थ्य पर अदरक का प्रभाव


 दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे अदरक का हमारे स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव है और अदरक हमारे स्वास्थ्य के लिए कैसे लाभकारी है।


 अदरक

 संस्कृत में अदरक को विश्व औषध  नाम दिया गया है। अदरक वात्घन,  दीपक , पाचक,  सारक, चक्षुष्य  और पौष्टिक है। 


  वेदक गुणों के कारण यह क्रीमी का नाश करता है और उन्हें मलद्वार से बाहर निकाल देता है अदरक आपके लिए एक उत्तम टानिक है अदरक का रस निरापद एवं प्रति प्रभाव से रहित है।



 भोजन के समय से आधा घंटा पूर्व यदि किंचित सेंधा नमक और कुछ नींबू की बूंदे मिलाकर तीन चार चम्मच अदरक का रस पिया जाए तो भूख खुलती है इस देश के तरफ से पेट में पाचक रसों का योग्य प्रमाण मिश्रा होता है


 यह जुखाम सर्दी को समूल नष्ट कर देता है ह्रदय के  विकारों को दूर करता है और सभी प्रकार के उद्योगों को शांत कर देता है अदरक का रस सूजन मूत्र विकार पीलिया और सुदामा खासी जरूर आदि रोगों में भी लाभदायक होता है आयुर्वेद विशेषज्ञों का मत है कि अदर के नियमित सेवन से जीव एवं गले का कैंसर नहीं होता।

धन्यवाद 





शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

सितंबर 11, 2020

सीताफल का स्वास्थ्य पर प्रभाव

  सीताफल का स्वास्थ्य पर प्रभाव


 दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे कि सीताफल हमारे लिए किस प्रकार से लाभ लाभकारी है उसके क्या-क्या उपयोग है और हमारे स्वास्थ्य पर वह क्या क्या प्रभाव डालता है।



सीताफल 


 अगस्त नवंबर के आसपास आने वाला सीताफल एक स्वादिष्ट फल है।


 आयुर्वेद के मतानुसार सीताफल शीतल , पित्तशामक ,  पोस्टिक , तृप्ति कर्ता ,  मांस एवं रक्तवर्धक उल्टी बंद करने वाला बलवर्धक वातदोष सामक और हृदय के लिए हितकर है।


शरीफा | सीताफल



 आधुनिक विज्ञान के मतानुसार सीता फल में कैल्शियम लोह तत्व फास्फोरस विटामिन थायमिन राइबोफ्लेविन एवं विटामिन c आदि अच्छे प्रमाण में होते हैं। 

जिन लोगों की प्रकृति गर्म था कि पित्त प्रधान  है उनके लिए सीताफल अमृत के समान गुणकारी है।


 जिन लोगों का हृदय कमजोर होता है का स्पंदन खूब ज्यादा हो घबराहट होती हो उच्च रक्तचाप हो ऐसे रोगियों के लिए भी सीताफल का नियमित सेवन हृदय को मजबूत एवं क्रियाशील बनाता है।


 जिन्हें खूब भूख लगती हो आहार लेने के उपरांत भी भूख शांत ना होती हो ऐसे भस्मक रोग में भी सीताफल का सेवन लाभदायक है।


 विशेष 

सीताफल गुड में अत्यधिक ठंडा होने के कारण ज्यादा खाने से सर्दी होती है ठंड लगकर बुखार आने लगता है अर्थात जिनकी कब सर्दी की तासीर हो ऐसे में सीताफल का सेवन ना करें जिनकी पाचन शक्ति मंदिर उन्हें सीताफल का सेवन बहुत सोच समझकर सावधानी से करना चाहिए अन्यथा लाभ के बदले हानि होती है।


 मित्रों आशा है कि आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी और आपको इससे काफी जानकारी मिली होगी।


 धन्यवाद

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शनिवार, 5 सितंबर 2020

सितंबर 05, 2020

अष्टांग योग और उसका प्रयोग

  अष्टांग योग और उसका प्रयोग 



 नमस्कार दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे कि अष्टांग योग क्या होता है और उसका क्या क्या प्रयोग है।


 अष्टांग योग


 परमानंद की प्राप्ति के लिए हमारे ऋषि-मुनियों ने समाज के 

 साधन स्वरूप जो व्यवस्था कि उसे योग  कहते हैं योग साधना  द्वारा ही परम सत्य की अनुभूति की जा सकती है ऋषि यों ने योग चतुष्टय का विधान किया है ।

1- भक्तियोग 

2- कर्मयोग 

3- राजयोग 

4-ज्ञान योग 


आगे चलकर अनेक आचार्य हुए और अनेक प्रकार की योग मार्गों का प्रचलन किया जैसे हठ योग , क्रिया योग , लय योग , नादानुसंधान आदि परंतु खड दर्शन में जिस युग जी से यह कहा गया है उसका संबंध पतंजलि से है। 



योग |



 ऋषि पतंजलि ने योग सूत्र में योग की परिभाषा देते हुए का योग चित्तवृत्ति निरोध (चित्त की  वृत्तियों का निरोध योग कहलाता है ) भारत में योग विद्या प्राचीन है। पातंजल योग सूत्र महर्षि पतंजलि का प्रसिद्ध ग्रंथ है ऐसी ग्रंथ के आधार पर अष्टांग योग की व्याख्या की गई है आठ अंग होने से इसे अष्टांग योग कहा जाता है।


 उसके नाम निम्न है-

 यम, नियम , आसन , प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान , समाधि


 यम



  यम 5 है -  अहिंसा , सत्य , ब्रम्हचर्य , अपरिग्रह



यम वे गुड़ हैं जिनके व्यवहारिक जीवन को सात्विक और दिव्य  बनाया जाता है और व्यक्ति को समाज में नियंत्रित व्यवहार करने में सहायता मिलती है। यह निम्नलिखित है-



 अहिंसा 

क्रिया,  बढ़िया विचार द्वारा किसी भी प्रकार की हिंसा न  करना।


 सत्य 

मन,  वचन और कर्म में सत्य का प्रयोग।


 अस्तेय

 चोरी ना करना अथार्त् दूसरों की वस्तु को उसकी अनुमति के बिना ना लेना।


ब्रम्हचर्य 

  आत्म संयम एवं सादगी पूर्वक रहकर वीर्य की रक्षा करना तथा ब्रह्म साक्षात्कार करने के प्रयास में रत्त रहना।


अपरिग्रह 

आवश्यकता से अधिक भोग्य वस्तुओं का संग्रह न करना।



योग ध्यान समाधि



 नियम 5 है 


संतोष , शौच ( शुद्धता) , तप ( सुख-दुख समान),  स्वाध्याय,  ईश्वर प्राणिधान



 नियम 

वे गुड़ हैं जो व्यक्ति के चारित्रिक विकास में सहायक हैं नियम का लाते हैं ।

यह 5 है -


शौच

शरीर और मन की सुचिता , अंतर ब्राहे स्वच्छता 


संतोष 

जो कुछ अपने पास है उसी से संतुष्ट रहना तथा किसी वस्तु के अभाव का कष्ट अनुभव ना करना।


 तप

 किसी ऊंचे दिए के लिए कष्ट सहन करना अथक परिश्रम करना।



 स्वाध्याय 

ज्ञानार्जन के लिए सद ग्रंथों का अध्ययन एवं सत्पुरुषों का समागम ।


ईश्वर प्राणिधान

 अपने कर्म और अपनी इच्छाओं का ईश्वर को समर्पण करना।




 दोस्तों आशा है कि आप लोगों को मेरी पोस्ट ज्ञानवर्धक और अच्छी लगी होगी और पूर्णतया आपसे आपको कोई ना कोई जानकारी मिली ही होगी मिलते हैं अगले पोस्ट में


 धन्यवाद


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मंगलवार, 1 सितंबर 2020

सितंबर 01, 2020

कुंभ और कुंभ का महत्व

   कुंभ और कुंभ का महत्व

 नमस्कार दोस्तों आज किस पोस्ट में हम जानेंगे कि  कुंभ का महत्व क्या है और कुंभ कहां कहां पर लगता है आखिर कुंभ क्या है


कुंभ 


 भारतीय धर्म संस्कृति में कुंभ महत्वपूर्ण पर्व है कुंभ का स्थान पुरातन समय से निर्धारित है देवता और राक्षस द्वारा सामूहिक प्रयास से समुद्र मंथन कार्य संपन्न हुआ था जिसके परिणाम स्वरुप 14 रत्न निकले इस सिम में अमृत कलश भी था।

कुंभ-और-कुंभ-का-महत्व


 अमृत वितरण में विवाद होने पर पक्षीराज गुरु अमृत कलश कुंभ  ले कर चले गए यह मान्यता है कि पक्षीराज गरुड़ ने हरिद्वार , प्रयाग राज , उज्जैन और नासिक में इस अमृत कलश को रखा है जहां जहां भी अमृत कलश रखा गया वहां अमृत की कुछ बूंदें छलकी अमृत  बिंदु सेवा संस्थान पुरवा इन स्थानों पर को का आयोजन होता है सामूहिक सद्भाव सहयोग सजीवन और समरसता विश्व में अद्भुत उदाहरण है । 

सोमवार, 31 अगस्त 2020

अगस्त 31, 2020

हिंदू धर्म में 27 नक्षत्र एवं 18 पुराणों के नाम

  हिंदू धर्म में 27 नक्षत्र एवं 18 पुराणों के नाम



 नमस्कार दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे कि हमारे हिंदू धर्म में कितने नक्षत्र होते हैं और उनके क्या-क्या नाम हैं और साथ ही साथ हम पुराणों के बारे में भी जान लेंगे और समस्त पुराणों के नाम को भी जानेंगे।


 नक्षत्र एवं उनके नाम

 हमारे हिंदू धर्म में ज्योतिष विद्या  का महत्व है जो हमारे ब्रह्मांड की खगोलीय घटनाओं के बारे में बताता है जिसमें नक्षत्र का बहुत बड़ा महत्व होता है। नक्षत्रों की कुल संख्या 27 है जिनके नाम निम्नलिखित हैं-


नक्षत्र
27 नक्षत्र 




 पश्चिम से पूर्व की ओर इनके नाम इस प्रकार हैं


 अश्विनी , भरणी , कृतिका , रोहिणी,  मृगशिरा , आर्द्रा , पुनर्वसु , पुष्य , आश्लेषा , मघा , पूर्वा- फाल्गुनी , उत्तरा-फाल्गुनी , हस्त , चित्रा , स्वाती , विशाखा , अनुराधा , ज्येष्ठा , मूल , पूर्वाखाड़ा ,  उत्तराधिकारी,  धनिष्ठा , शतभिषा , पूर्वाभाद्रपद , उत्तराभाद्रपद ,  और रेवती 

यदि प्रत्येक नक्षत्र को चार चरणों में बांटा गया है उत्तराखाणा के चौथे चरण और श्रवण के पहले 15वें भाग को  अभिजित नक्षत्र कहते  हैं कृतिका नक्षत्र का एक नाम कचवचिया भी है।

पूराण एवं पूराण के नाम 



 हमारे हिंदू धर्म में पूराण  भी अत्यधिक महत्व रखते हैं जो हमारे धर्म के बारे में जानकारी देते हैं और हमें ज्ञान प्रदान करते हैं हमारे हिंदू धर्म में पुराणों की संख्या 18 बताई गई है।


पूराण




 जिसमें श्रीमद्भागवत महापुराण सबसे अधिक महत्व रखता है अन्य पुराण भी अपने अपने जगह पर महत्त्व रखते हैं।


 उनके नाम निम्नलिखित हैं-

 मत्स्य पुराण , मार्कंडेय पुराण , भविष्य पुराण , भागवत महापुराण , ब्रह्मांड पुराण ,:ब्रह्मा वैवर्त पुराण , ब्रह्मा पुराण , वामन पुराण , वाराह पुराण , विष्णु पुराण ,  अग्नि पुराण , पदम पुराण , लिंग पुराण ,  कुर्म पुराण , स्कंद पुराण , नारद पुराण , वायू पूराण और  गरूण पूराण



 आशा दोस्तों आप लोगों को मेरी पोस्ट अच्छी लगी होगी और आपको इससे जरूर कुछ ना कुछ ज्ञान प्राप्त हुआ होगा।



 धन्यवाद

रविवार, 9 अगस्त 2020

अगस्त 09, 2020

भारत के 5 प्रसिद्ध अंग्रजी साहित्य लेखक

  

भारत के 5 प्रसिद्ध  अंग्रजी साहित्य लेखक 


हेलो फ्रेंड्स आज की पोस्ट में हम जानेंगे कि इंडिया के 5 मोस्ट पापुलर लेखक कौन से हैं और उनकी फेमस बुक कौन सी है।


 हमारे देश में बहुत सारे लेखक हैं जिनमें से एक नाम Jumpha Lahiri का भी आता है यह काफी प्रसिद्ध लेखिका है इनकी पुस्तक का नाम है Intrepreter of mind  इस बुक में हमें दिमाग के बारे में अंग्रेजी में जानकारी दी गई है।

Famous Indian author
Jumpha lehiri 



 

   अब हमारे अगले साहित्य के लेखक हैं Rk narayan  यह भी प्रसिद्ध लेखक हैं इनकी प्रसिद्ध किताब है The English teacher   यह पुस्तक अंग्रेजी भाषा में लिखिए क्योंकि अंग्रेजी साहित्यकार हैं।


Rk narayan | famous Indian author



 हम Khuswant singh   को भी एक अच्छे अंग्रेजी साहित्यकार के रूप में जानते हैं उनकी प्रसिद्ध पुस्तक है train to Pakistan  इस पुस्तक में भारत और पाकिस्तान दोनों के बारे में बताएं इनकी रचना अंग्रेजी में है ये अंग्रेजी भाषा के अच्छे  साहित्यकार हैं और यह भारतीय भी हैं।

Khuswant singh | famous Indian author
Khuswant singh 


 अब अगले भारतीय अंग्रेजी साहित्यकार हैं Ruskin bond  इन की पुस्तक का नाम है death under the deodars  है इस पुस्तक को  अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है।

Ruskin bond | famous Indian author
Ruskin bond 


 अब हमारे अगले अंग्रेजी साहित्य के साहित्यकार हैं Vikram seth  उनकी प्रसिद्ध पुस्तक का नाम है two lives  इन्होंने भी अंग्रेजी साहित्य में काफी अच्छी ख्याति प्राप्त की है।



 आशा है आपको यह पोस्ट अच्छी लगी होगी हमने इस पूरे पोस्ट में जाना है है कि भारत में पांच अंग्रेजी साहित्य कार्य कौन-कौन से हैं और उनकी प्रसिद्ध पुस्तक कौन सी है।



 धन्यवाद


रविवार, 26 जुलाई 2020

जुलाई 26, 2020

ओजोन क्षरण के बारे में कुछ रोचक तथ्य

 ओजोन क्षरण के बारे में कुछ रोचक तथ्य

दोस्तों,  आज हम इस पोस्ट में जानेंगे की ओजोन क्षरण क्या होता है और इसका क्या प्रभाव है और हम इसके बारे मे कुछ रोचक तथ्य को भी जानेंगे।


ओजोन क्षरण 


 वर्तमान समय में ओजोन क्षरण का एक प्रमुख पर्यावरणीय समस्या है। वायुमंडल के संताप मंडल में पृथ्वी से लगभग 50 किलोमीटर की ऊंचाई पर ओजोन गैस  की मोटी परत पाई जाती है।  ओजोन गैस oxygen  के तीन परमाणुओं के reaction  से बना होता है। ओजोन परत पृथ्वी पर जीवन के लिए सुरक्षा कवच है। यह परत  सूर्य से आने वाली हानिकारक पैराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है जिससे या किरणें पृथ्वी तक नहीं जा पाती हैं। 

ओजोन क्षरण का प्रभाव| effect of ozone depletion


 यदि यह किरणें पृथ्वी तक आने लगे लगे तो जिवों कि Gene संरचना में विकृति उत्पन्न होगी त्वचा कैंसर एवं त्वचा संबंधी बीमारियां फैैलेेंंगी।  मोतियाबिंद एवं नेत्र संबंधी बीमारियां उत्पन्न होगी।  जलीय जीवो एवं पौधों में ऊतक क्षरण होगा जिससे फसलों का उत्पादन कम हो जाएगा। 

ओजोन क्षरण का प्रभाव| effect of ozone depletion




 क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस ओजोन परत को सबसे अधिक क्षति पहुंचाती है। C.F.Cs गैस में उपस्थित क्लोरीन ओजोन गैस से क्रिया करके इसे इसे नष्ट कर रही है। जिसे ओजोन क्षरण  कहते हैं।  वर्तमान समय में दक्षिणी ध्रुव अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन परत में छिद्र  बन गया है जिससे  पैराबैगनी किरणें पृथ्वी तक आने लगी है।  क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस का उत्सर्जन रेफ्रिजरेटर एयर कंडीशनर एवं प्लास्टिक, पेंट व रसायन का निर्माण करने वाले फैक्ट्रियों द्वारा किया जा रहा है।


  पृथ्वी  पर जीवन की सुरक्षा के लिए क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस के उत्सर्जन पर रोक लगाने की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ओजोन परत के महत्व तथा इसके क्षरण में होने वाले दुष्परिणाम के बारे में लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। यदि  संपूर्ण विश्व समय से सचेत नहीं हुआ तो पृथ्वी पर जीवन नष्ट हो जाएगा।



तो दोस्तो हम सबको ओजोन क्षरण को रोकना भी होगा।

धन्यवाद 





शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

जुलाई 24, 2020

Mobile tower radiation का पंछियों पर प्रभाव


Mobile tower radiation का पंछियों पर प्रभाव 

इस पोस्ट मे हम जानेंगे कि पंछियों पर mobile tower radiation क्या प्रभाव पड़ता है।

Mobile Tower radiation का प्रभाव 

 मोबाइल फोन का व्यापक उपयोग मानव स्वास्थ्य पर संभावित प्रतिकूल प्रभाव के बारे में सार्वजनिक बहस के साथ किया गया है। बहुत कम लोगों को दीर्घकालिक जोखिम के प्रभाव के बारे में पता है जो पक्षियों और अन्य असहाय प्राणी द्वारा मोबाइल फोन बेस स्टेशनों के पास रहने का अनुभव है।
Effect_of_mobile_tower_radiation_on_birds



Orienthlogist  का दावा है कि कभी भी स्पैरो कबूतर या किसी पक्षी को सेल टॉवर के पास रहने पर उड़ते हुए नहीं देखा जाएगा। एक शब्द के बड़े सतह क्षेत्र के लिए विद्युत चुम्बकीय विकिरण के अवशोषण में वृद्धि का कारण मानव शरीर की तुलना है क्योंकि तरल पदार्थ के बाद से बिजली शक्ति घनत्व क्षेत्र कम वजन के कारण यह बहुत तेजी से गर्म हो जाता है और साथ ही चुंबकीय क्षेत्र भी नेविगेशन कौशल को बिगाड़ देता है जब पक्षियों को सप्ताह के चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में लाया जाता है। वे भटकाव करते हैं और सभी दिशाओं में उड़ना शुरू करते हैं जो प्रवासी पक्षियों को नौवहन क्षमताओं को कम करके समझाते हैं।

 दूरसंचार मास्टरों के साथ टक्कर से हर साल लाखों प्रवासी पक्षी मर जाते हैं।

 हाल के दशकों के दौरान वहाँ गौरैया की आबादी में उल्लेखनीय गिरावट आई है। लंदन में गौरैया की 75% पाल की जनसंख्या में भारी गिरावट देखी गई है, एक प्रयोग में 75% चिकन भ्रूण हैं जो टैक्सी के दौरान एक जीएसएम मोबाइल फोन के संपर्क में थे। 16% जो किसी भी विकिरण के संपर्क में नहीं थे, अगले वर्ष टावर्स के पास विनियमित हैच में विफल हो जाते हैं। मोबाइल टेलिकम्यूनिकेशन बेस स्टेशन के पास केस्टेल, सफेद सारस रॉक कबूतर कबूतर जैसे पक्षियों का एक सामान्य लापता देखा गया है।

पक्षियों को सेल फोन विकिरण प्रभाव पर नहीं, लेकिन वे भी मानव गतिविधि का प्रभाव। विश्व स्वास्थ्य संगठन w.h.o. लंबे समय से और सेल फोन के उपयोग से मस्तिष्क कैंसर के बढ़ते जोखिम के कारण एक संभावित मानव कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत सेल फोन विकिरण अनुसंधान दिखा रहा है कि यह आपकी मस्तिष्क की गतिविधि को बदल सकता है जिस तरह से हम अभी तक समझ नहीं पाते हैं।


धन्यवाद 

बुधवार, 22 जुलाई 2020

जुलाई 22, 2020

हिंदी के बारे मे 18 रोचक तथ्य

 हिंदी के कुछ रोचक तथ्य



 इस पोस्ट में हम  हिंदी के कुछ रोचक तथ्यों के बारे में जानेंगे जो तथ्य आप सब लोग को जानना अत्यंत आवश्यक है


हिंदी 

 हिंदी न केवल भारत में बल्कि दुनिया के कई देशों में भी बोली जाती है और दुनिया में अपना एक अलग स्थान रखती है। आज हिंदी किस तरह अपनी पहचान बना चुकी है इसका ताजा उदाहरण हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल ही में गए US यात्रा से लगाया जा सकता है जहां प्रधानमंत्री मोदी ने फेसबुक की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में हिंदी में ही वार्ता किया जबकि उस कार्यक्रम के फेसबुक के CEO मार्क जुकरबर्ग ने इंग्लिश मे host किया। इस तरह मोदी जी ने हिंदी में वार्तालाप करने को एक अलग मुकाम तक पहुंचा दिया यह हम हिंदी भाषियों के लिए proud moment मे से 1 में से एक है हिंदी को लेकर कुछ ऐसे ही तथ्य जो उसे उसे अद्भुत बनाते हैं जिन्हें नीचे दिया गया है।


हिंदी के कुछ रोचक तथ्य 


 1)  पूरे विश्व में 500 मिलियन से भी ज्यादा लोग हिंदी बोल और समझ सकते हैं जो इसे विश्व की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक बनाता है।

2) हिंदी 40% से ज्यादा भारतीयों  की मातृभाषा है भारत में आज के समय बोली जाने वाली हिंदी को मॉडर्न स्टैंडर्ड स्टैंडर्ड हिंदी या मानक हिंदी कहते हैं।

3)  हिंदी भारत की 7 भाषाओं में से एक है जिसे web address  बनाया जा सकता है

4) केवल भारत ही नहीं हिंदी मारीशस, नेपाली, नीड टू बेगू आंटी जी आदि देशों में बड़ी संख्या में बोली जाती है

 5) भारतीय संविधान में 14 सितंबर 1949 को हिंदी की देवनागरी लिपि को अधिकारिक तौर पर मान्यता प्रदान की गई इसलिए 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस भी मनाया जाता है।

6)  1881 में बिहार ने उर्दू को छोड़ हिंदी को अपनी एकमात्र ऑफिशियल लैंग्वेज बना लिया था ऐसा करने वाला भारत का यह पहला राज्य था

7)  हिंदी शब्द को पर्शियन भाषा के साथ हिंद से लिया गया है

8)  देश में हर पांच में से एक व्यक्ति  इंटरनेट को हिंदी में चलाना पसंद करता है।

9)  हिंदी के बारे में 1 रोचक तथ्य यह भी है कि हिंदी मूल्यतः फारसी भाषा का शब्द है।


10)  हिंदी व्याकरण में कोई आर्टिकल नहीं है जैसे  अंग्रेजी में the, a और an

 11) 36000000 लोगों के लिए हिंदी मातृभाषा है वहीं  इस भाषा को कुल 487000000 लोग उपयोग करते हैं। 


12)  देवकीनंदन खत्री द्वारा वर्ष 1988 में लिखे गए चंद्रकांता को आधुनिक हिंदी का पहला आर्थेन्टिक  वर्क कहा जाता है।

13)  हिंदी की पहली कविता प्रख्यात कवि अमीर खुसरो ने लिखी थी।

14)   1977 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को हिंदी में संबोधित किया।

15) नमस्ते शब्द हिंदी भाषा का सबसे ज्यादा प्रयोग किए जाने वाला शब्द है।

16)  आज भी यूनाइटेड स्टेट अमेरिका के 45 विश्वविद्यालय सहित पूरे विश्व के लोग लगभग 176 विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है।

17)   गूगल ने कहा है कि इंटरनेट पर हिंदी कंटेंट की खपत बढ़ना शुरू हो गई है यह साल दर साल इंग्लिश कंटेंट के 19%  ग्रोथ के मुकाबले 94% बढ़ती जा रही है।


 18 )  हिंदी के को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले हिंदी अखबार ही हैं उन्होंने अंग्रेजी अरबी और फारसी भाषा के शब्दों को जानबूझकर अखबारों में घुसाकर प्रचलन मे ला दिया है।


धन्यवाद 



जुलाई 22, 2020

मानव जाति मे हारमोंस का प्रभाव। effect of hormones on human

 मानव जाति में हारमोंस का प्रभाव

 दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे कि हारमोंस हमारे शरीर के लिए लाभदायक है या नहीं अथवा क्या कोई रोग भी हो सकता है हार्मोन की कमी से या हारमोंस के अधिक होने से और कौन सा हारमोंस  अच्छा है या बुरा है।

हारमोंस का मानव जीवन और स्वास्थ्य पर प्रभाव 

 नियमित व्यायाम शरीर और मन मानसिक सेहत के लिए अच्छा होता है एक अध्ययन के द्वारा यह पाया गया कि ओपन ऑफिस में बैठने वाले केबिन में बैठने वालों से ज्यादा सक्रिय होते हैं।

हारमोंस का प्रभाव। effects of harmones

 तनाव किसी के लिए भी ठीक नहीं है एक अध्ययन के मुताबिक तनाव होने पर शरीर के कार्टीसाल हार्मोन का प्रभाव बढ़ता है इस हारमोंस का नकारात्मक प्रभाव गर्भ में पल रही बेटी पर बेटों की तुलना में ज्यादा पड़ता है कार्टीसाल हार्मोन के कारण जन्म के बाद 2 साल की उम्र में ही बेटियां में anxiety  और अवसाद के लक्षण नजर आने लगते हैं। यह तथ्य बायोलॉजिकल साइकैट्री नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।



 यदि नियमित रूप से सप्ताह में दो या तीन बार एरोबिक व्यायाम कर लिए जाएं तो सिजनोफ्रेनिया जैसी बीमारियों के लक्षणों को कम किया जा सकता है।  इन कार्यों से मानसिक बीमारियां का सामना करने वाले लोगों में भी बीमारियां के विरुद्ध लड़ने की क्षमता का विकास होता है।




 क्या तनाव से बढ़ता है कैंसर का खतरा


 तनाव को सीधे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह व मानसिक रोगों से जोड़ा जाता है। हाल ही में नए शोध के नतीजे चौंकाने वाले हैं इनमें तनाव के साथ ही नकारात्मक सोच को कैंसर जैसी जानलेवा रोग की वजह बताया जा रहा है।

हारमोंस का प्रभाव|effect of hormones|cancer


 तनाव के शिकार बने रहने वाले व्यक्ति के शरीर में खराब हारमोंस जैसे कार्टीसाल के दुष्प्रभाव से कुछ रसायन जैसे ए एड्रीनलीन  की कमी शरीर की कोशिकाओं को नष्ट कर देती है जो दिमाग के भावनात्मक सेंटर को नुकसान पहुंचाता है। इससे शरीर के विभिन्न अंगों को गलत संदेश मिलता है और कैंसर जैसी टेढ़ी-मेढ़ी कोशिकाएं बनती हैं। शरीर में मौजूद नेचुरल सेल्स इन खराब कोशिकाओं को नष्ट नहीं कर पाती जिससे व्यक्ति कमजोर पड़ जाता है अतः शरीर में लंबे समय के पश्चात एड्रीनलिन का स्त्राव बंद हो जाता है।




 क्या हारमोंस  से तय होता है इंसान का स्वभाव

हाँ,  दोस्तों हमार स्वभाव  हारमोंस पे निर्भर करता है आइए आगे पढ़ते है 


 हारमोंस के कारण मनुष्य की मानसिक प्रकृति में परिवर्तन आता है हारमोंस न सिर्फ शारीरिक विकास परंतु उसके मस्तिष्क भावनाओं व व्यवहार को भी प्रभावित करता है। हर व्यक्ति में हारमोंस का स्तर अलग अलग होता है अतः इसके द्वारा ही मानव का स्वभाव तय होता है जैसे गुस्सा होना, एकाग्रता, मानसिक योग्यता, धैर्यता, उत्तेजन-शीलता स्थिरता इत्यादि।

 दो अलग-अलग लोगों का एक दूसरे के प्रति आकर्षण प्रतिकर्षण की भावना का विकास भी हारमोंस  पर निर्भर करता है इस क्रिया में ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्त्राव और अत्यधिक होता है जिसे कारण व्यक्ति  दूसरे से जल्द ही आकर्षित हो जाता है।

 हारमोंस का असंतुलन कई बार परेशानी का कारण बन जाता है जैसे भी सामाजिक अपराधिक समस्याएं, एसिड अटैक, अनियंत्रित उत्तेजना द्वारा मर्डर, रेप केस इत्यादि इसका जीवंत उदाहरण है।

 माइग्रेन से पीड़ित महिलाओं के लिए हार्मोन थेरेपी सुरक्षित है या नहीं


 माइग्रेन अलग-अलग तीव्रता का सिर दर्द है। जिससे पीड़ित महिलाओं को अक्सर मितली प्रकाश व ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता की शिकायत रहती है।

मानव जाति मे हारमोंस का प्रभाव | effects of harmones



 एकसोजीनस एस्ट्रोजन को एक साथ उपयोग और माइग्रेन पीड़ित महिलाओं में सिरदर्द व मितली का खतरा बढ़ने के कारण माइग्रेन से ग्रस्त महिलाओं में हार्मोन थेरेपी कारगर साबित हो रही है।

  हमारे जीवन प्रत्याशा में मानवीय  दर में वृद्धि हो रही है सोसाइटी की समस्याएं हल करना कभी-कभी ऐसा लगता है कि तकनीक केवल समस्याओं का कारण बनती जा रही है या चीजों को जटिल बना रही है परंतु ऐसा नहीं है। एक साधारण  जीवन के लिए उत्सुक हैं बिना सेलफोन ट्रैफिक जाम और खतरनाक हथियार से जीवन असंभव सा हो गया है लेकिन सच्चाई यह है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में समाज की कई समस्याओं को हल भी किया है और भविष्य में ऐसा जारी रहेगा पिछले 200 वर्ष में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने पूरी दुनिया को बदल दिया है आज हम सभी प्रकार के चीजों से घिरे हुए हैं जो एक शताब्दी पहले अकल्पनीय थी जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की बिना असंभव है।


धन्यवाद 




मंगलवार, 21 जुलाई 2020

जुलाई 21, 2020

क्यों हिंदू लगाते हैं तिलक???????

तिलक लगाने का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण 

 दोस्तों आज इस पोस्ट में हम जानेंगे आखिर हम तिलक क्यों लगाते हैं इसका वैज्ञानिक कारण क्या है और धार्मिक रहस्य क्या है इसके साथ  हम यभी जानेंगे कि तिलक कितने प्रकार का होता है किसको तिलक लगाना चाहिए या किसको नहीं लगाना चाहिए




तिलक क्यों लगाएं


 शास्त्रों के अनुसार यदि ब्राह्मण तिलक नहीं लगाता है तो उसे चांडाल समझना चाहिए तिलक धारण करना धार्मिक कार्य माना गया है। 

तिलक क्यों लगाएं।tilak Kyo legate hai



  तिलक के प्रकार और धार्मिक कारण

 तिलक, त्रिपुंड, टीका अथवा  बिंदी आदि का सीधा संबंध मष्तिष्क से  होता है।  मनुष्य की दोनों भौहों के बीच जिस स्थान पर तिलक  लगाते हैं वहाँ आज्ञा चक्र स्थित है इस चक्र पर ध्यान केंद्रित करने पर साधक का मन पूर्ण शक्ति  संपन्न हो जाता है इसे चेतना केंद्र भी कहा जाए जाए तो अनुचित नहीं होगा अर्थात समस्त ज्ञान एवं चेतना का संचालन इसी स्थान से होता है। आज्ञा चक्र ही तृतीय नेत्र है इसे दिव्य नेत्र भी कहते हैं तिलक लगाने से आज्ञा चक्र जागृत होता है ।जिसकी तुलना रडार टेलीस्कोप आदि से की जा सकती है इसके अलावा तिलक सम्मान सूचक भी है तिलक लगाने के से साधु सज्जनता एवं धार्मिकता का आभास होता है।



 तिलक धारण करने का वैज्ञानिक कारण

 जब हम मस्तिष्क से आवश्यकता से अधिक काम लेते हैं तब ज्ञान तंतुओं का विचारक केंद्र भृकुटी और ललाट के मध्य भाग में पीड़ा उत्पन्न हो जाती है ठीक उसी स्थान पर जहां तिलक त्रिपुंड लगाते हैं चंदन का तिलक ज्ञान तंतुओं को शीतलता प्रदान करता है। जो प्रतिदिन प्रातः काल स्थान स्नान के पश्चात चंदन का तिलक लगाता है उसे सिर दर्द का शिकायत नहीं होता इस तथ्य को डॉक्टर से एवं वैध हकीम स्वीकार करते हैं।


 कुमकुम क्या है कुमकुम का तिलक क्यों लगाते हैं

 कुमकुम हल्दी का चूर्ण होता है जिसमें नींबू का रस मिलाने से लाल रंग का हो जाता है। 
तिलक क्यों लगाएं।tilak Kyo legate hai



आयुर्वेद के अनुसार कुमकुम तत्व शोधन  के लिए सर्वोत्तम औषधि है इसका तिलक लगाने से मस्तिष्क तंतु में क्षीणता नहीं आती।



 भस्म का तिलक क्यों लगाते हैं



 भस्म भी  एक तरह से देवताओं का प्रसाद है भोग के लिए देवताओं को चढ़ाया गया मिष्ठान आज तो प्रसाद होता है किंतु  यज्ञ भस्म  ऐसा  प्रसाद है जो खाया नहीं जाता बल्कि भस्म रूपी राख सिर एवं शरीर में पूरी श्रद्धा भक्तों से लगाई जाती है।

तिलक क्यों लगाएं।tilak Kyo legate h




निष्कर्ष 

 दोस्तों ऊपर की पोस्ट की मदद से हमें जाने हैं कि तिलक लगाने से हमारे मस्तिष्क में शांति प्रदान होती है हमारा मन एकाग्र चित्त होता है इसलिए तिलक लगाना आवश्यक होता है और इससे हमारा सम्मान बढ़ता है और हमारी धार्मिक सोभा को भी बढ़ाता है


धन्यवाद 






जुलाई 21, 2020

क्यों हिंदू स्त्रियां लगाती हैं मांग में सिंदूर

 क्यों हिंदू स्त्रियां लगाती हैं मांग में सिंदूर ?


 दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे कि स्त्रियां आखिर क्यों सिंदूर लगाती हैं क्या इसका कोई वैज्ञानिक कारण भी है अगर है तो क्या है


धार्मिक कारण

 मांग में सिंदूर लगाना सुहागिन स्त्रियों का सूचक है। हिंदुओं में विवाहित स्त्रियां ही सिंदूर लगाती हैं।  कुंवारी कन्याओं एवं विधवा स्त्रियों के लिए सिन्दूर लगाना वर्जित है इसके अलावा सुंदर लगने से स्त्रियों के सौंदर्य में भी निखार आता है। अर्थात उनकी सुंदरता बढ़ जाती है।
क्यों हिंदू स्त्रियां लगाती हैं मांग में सिंदूर ?। striyan sindoor Kyo lagati hai



  विवाह संस्कार के समय पर दूल्हा दुल्हन के मस्तक में मंत्रोच्चार के मध्य 5 अथवा 7 बार चुटकी सिंदूर लगाता है तत्पश्चात विभाग कार्य संपन्न हो जाता है। उस दिन से वह स्त्री अपने पति की दीर्घायु लंबी आयु के लिए प्रतिदिन सिंदूर लगाती हैं मांग में दमकता सिंदूर स्त्रियों के श्रृंगार का प्रमुख अंग है।



 सिंदूर लगाना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी आवश्यक है अथवा या केवल   रूढ़िवादिता है।  

 ब्रह्मरन्ध्र और अध्मि नामक मर्म स्थान के ठीक ऊपर स्त्रियां सिंदूर लगाती हैं ; जिसे सामान्य भाषा में सीमांत अथवा मांग कहते हैं। 

क्यों हिंदू स्त्रियां लगाती हैं मांग में सिंदूर ?। sintific reason of using sindoor


पुरुषों की अपेक्षा इस स्त्रियों का यह भाग अपेक्षाकृत कोमल होता है क्योंकि सिन्दूर में पारा जैसी धातु अधिक पाई जाती है जो स्त्रियों के शरीर की विद्युत ऊर्जा को नियंत्रित करती है।  तथा मर्म स्थान को बाहरी दुष्प्रभावों से बचाती भी है अतः वैज्ञानिक दृष्टि से भी स्त्रियों को सिंदूर लगाना आवश्यक है


धन्यवाद 

सोमवार, 20 जुलाई 2020

जुलाई 20, 2020

महर्षि चरक की जीवनी और चरक संघिता

  आयुर्वेद, आयुर्वेद के महर्षि चरक एवं चरक संहिता

 दोस्तों हम इस पोस्ट में आयुर्वेद महान आयुर्वेदिक महर्षि चरक चरक संहिता के बारे में जानेंगे

आयुर्वेद 

आयुर्वेद अथर्ववेद का एक उपवेद है।  यह मात्र चिकित्सा विज्ञान का शास्त्र नहीं है। आयुर्वेद के आदि प्रवर्तक तो अमृत कलश धारी भगवान धन्वंतरी माने जाते हैं;  परंतु आयुर्वेद शास्त्र का जो ज्ञान वर्तमान में उपलब्ध है, उसके आधारभूत ग्रंथ दो ही हैं- 1, चरक संघिता और 2,  सुश्रुत संहिता ।  चरक का प्रादुर्भाव आचार्य सुश्रुत से पहले हुआ था ऐसा सर्वमान्य है।  इनकी एकमात्र ग्रंथ  का नाम है 'चरक संघिता'। 
चरक की जीवनी और चरक संघिता। आयुर्वेद ज्ञान
चरक के बारे मे

चरक शब्द का अर्थ 

 आयुर्वेद के आचार्य चरक पर विचार करने के पहले चरक शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई इसकी जानकारी होना आवश्यक है ऋग्वेद मे एक सूक्त  ही है 'चरैवेति चरैवेति'।  चलते रहो ,चलते रहो ।  सर्वप्रथम चरक का अर्थ था भ्रमण सील विद्वान या विद्यार्थी।  बृहदारण्यक उपनिषद में इसका उपयोग इसी अर्थ में हुआ है ।  इस नाम (चरक) से विशेषता या कृष्ण यजुर्वेद की एक शाखा का बोध होता है कृष्ण यजुर्वेद की शाखाओं में अकेले चरक संप्रदाय की ही 12 शाखाएं थी ।  चरक शाखा के पहले तीन भागों के नाम ईथिमिका मध्यमिक और अरिमिका है ।  वैशम्पायन ऋषी के अंतेवासी भी चरक कहलाते थे। वैशम्पायन ऋषी का संबंध कृष्ण यजुर्वेद से हैं।  और उनके संबंधित एक शाखा का नाम भी चरक हैं।  इस प्रकार स्पष्ट है कि आयुर्वेद में चरक शब्द का अर्थ  बृहदारण्यक उपनिषद की परंपरा से  ग्रहण किया गया है । 

चरक की उत्पत्ति मे मतभेद 

 कुछ विद्वान चरक को कुषाण वंश के सम्राट कनिष्ठ के समय का बतलाते हैं परंतु यह मत सर्वथा अनुचित है इसकी पुष्टि कहीं भी नहीं हुई है।

चरक संघिता 

 चरक संघिता कृष्ण यजुर्वेद की परंपरा में होने से उसी की तरह गद्य और पद्य में है। इसमें अग्नि पुराण के बहुत से श्लोक  मिलते हैं तथा आचार्य कौटिल्य के अर्थशास्त्र की भांति भिन्न-भिन्न आचार्यों के मत को दिखाकर आत्रेय ने अपने मत को स्थापित किया है । इसकी भाषा शैली भी बहुत कुछ अर्थशास्त्र से मिलती जुलती है वास्तव में चरक संघिता महर्षि पुनर्वसु द्वारा उपदेश की हुई उनके शिष्य अग्निवेश द्वारा बनाई गई चरक  द्वारा प्रति संस्कार की गई है

चरक की जीवनी और चरक संघिता। आयुर्वेद ज्ञान
चरक संघिता 


 आखिर चरक संहिता में है क्या इसकी आयुर्वेद संबंधी विषय वस्तु क्या है?  ऐसे प्रश्न उठना उपर्युक्त वर्णन के संदर्भ में सहज स्वाभाविक है।  आयुर्वेद किस आधारभूत ज्ञान ग्रंथ का क्षेत्र काय- चिकित्सा तथा सीमित है। इसलिए जहां पर भी दूसरे शास्त्र से संबंधित विषय आता है,  वहां पर या तो उस शास्त्र के  ज्ञाता से सहायता लेने का निर्देश दिया गया है अथवा विषय वस्तु का संक्षेप में प्रतिपादन किया गया है।

 चरक संघिता में जितने ऋषि यों का उल्लेख मिलता है उतना अन्य किसी भी आयुर्वेद ग्रंथ में नहीं मिलता।  यथा -जमदग्नि, वशिष्ठ, भृगु,  अगस्त्य आदि कुछ  ॠषी के नाम नए हैं। यथा वडिस शरलोमा,  काप्य, कैकशैय , हिरण्याक्ष ।  भारद्वाज के साथ कुमार सिर विशेषण का प्रयोग किया गया है जो एकदम ने अन्य क्रिया विशेषण नहीं मिलता।


चरक के दर्शन 

 चरक ने प्रकृति और पुरुष को एक स्वीकार कर 24 तत्व  माने हैं। सांख्य दर्शन में पुरुष और प्रकृति को पृथक  मानकर 25 तत्व माने गए हैं। सांख्य  की भांति चरक संघिता मे ईश्वर  का उल्लेख नहीं है । चरक का मत वैश्विक और न्याय से बहुत कुछ मिलता है । चरक  संगीता में पुरुष पुनर्जन्म और रोग की प्रतिष्ठा आत्मा संबंधी प्रश्नों का विचार बहुत ही स्वतंत्र रूप से है। इसके अनुसार अस्तित्व का अर्थ है जो पुनर्जन्म  को माने । चरक में जन्म से जाति की कल्पना नहीं है, अध्ययन एवं क्रम में जांच उत्पन्न होती है इसे ब्राह्मण भोजन का उल्लेख नहीं है।
 चरक संघिता में आहार संबंधी सूचना विवेचन हैं और अन्य पान की विशेष जानकारी दी गई है। 20 25 तरह के तो चावलों का ही उल्लेख है। तथा मान्स , शाक,  फल वर्ग आदि का वर्णन है। फलों में अनार के शिवाय अन्य का उपयोग नहीं है। केला का उपयोग विशेष स्त्री रोग में है।  अंगूर का उपयोग मुख्य रूप में है।  गौरस से बनी हुई दाही तक्र आदि  व गन्ना  का वर्णन भी चरक संघिता में दिया गया है। गुड  शर्करा मोटी मिश्री कालपी या मुल्तानी मिश्री का उल्लेख है मधु के चार प्रकार का वर्णन इसमें है हरित वर्ग में मूली आदि का उल्लेख है।
चरक की जीवनी और चरक संघिता।आयुर्वेद ज्ञान
चरक की जीवनी 


चिकित्सा व्यवस्था 

 चरक संघिता में बैरी तथा अन्य व्यक्तियों के लिए धन की आवश्यकता का उल्लेख है। अर्थात बिना धन के बिना साधन के जीवन बिताना सबसे बड़ा पाप है साधन के लिए धन एकत्र करें इसके लिए सज्जनों से सम्मानित व्यक्तियों का अवलंबन करने को कहा गया है। वेद के लिए धन का इतना महत्व नहीं है जितना मान और यश का चरक संहिता में स्थान स्थान पर वैद्य को मान और यश की रक्षा करने का विधान है। श्रेष्ठ  तथा परिश्रम से किसी और औषद के  सिद्ध होने पर उसका विज्ञापन और सूचना देने का भी उल्लेख है।


वैद्य होने की योग्यता 

 वेद के साथी कैसे होंगे,  इसका भी चरक ने उल्लेख किया है।  यह साथी ऐसे चुनें, जो सहयोगी, कला कुशल , धन-धान्य से संपन्न, परस्पर अनुकूल रहने वाले , सामान प्रकृति ,एक की आयु,   नित्य प्रति काम में संलग्न,  प्रियावादी, समान शील,गुणो से समन्वित हो।



निष्कर्ष

 उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि महर्षि चरक की संघिता आयुर्वेद का आधारभूत ग्रंथ है।  जिसमें इस शास्त्र का सांगोपांग वर्णन है चरक संघिता का सम्यक अध्ययन किए बिना कोई भी आयुर्वेदज्ञ या वैद्य बनने की सामर्थ नहीं रखता।

धन्यवाद 
जुलाई 20, 2020

मूर्ति पूजा क्यों करें ?murti puja Kyo kare

 मूर्ति पूजा क्यों करें ? मूर्ति पूजा से क्या लाभ है?

 आज के इस पोस्ट में हम  यह देखेंगे कि मूर्ति पूजा करना आवश्यक है या नही; अथवा उससे क्या लाभ है


मूर्ति पूजा क्यों करें?

 उपासना मे पंचम श्रेणी  की मूर्तिपूजा है। मनुष्य का मन इधर-उधर भटकता रहता है चाह कर भी लोग अपने मन की चंचलता को नहीं रोक पाते।  मन की चंचलता को रोकने का एकमात्र साधन है मूर्ति पूजा।
मूर्ति पूजा क्यों करें ? मूर्ति पूजा से क्या लाभ है?murti puja Kyo kare, मूर्ति पूजा की आवश्यकता
मूर्ति पूजा की आवश्यकता 


 चंचल मन यदि बिना मूर्ति पूजा की स्थिर नहीं हो पा रहा है; तब मूर्ति पूजा के अतिरिक्त अन्य कोई साधन नहीं है ।मूर्ति पर दृष्टि रखने से उस मूर्ति के प्रति भावना जागृत होती है। और यह भावना ही मन की चंचलता को केंद्रित करती है।मूर्ति पूजा का प्रचलन सनातन हिंदू धर्म में ही नहीं बल्कि अन्य धर्म के लोगों में भी है।  सीख लो गुरु ग्रंथ साहिब की पूजा करते हैं इसाई क्रास कि और मुसलमान लोग कुरान शरीफ  को चुमते हैं। महाभारत काल  के प्रमाण एकलव्य ने द्रोणाचार्य को गुरु माना जबकि द्रोणाचार्य एकलव्य को शिष्य  रूप में स्वीकार  करने से मना कर दिया फिर भी एकलव्य ने उन्हें गुरु मानकर उनकी मिट्टी की प्रतिमा बनाकर बाण विद्या सीखा था इस भावना को भरने के लिए मूर्ति पूजा आवश्यक है।

मूर्ति पूजा से क्या लाभ? 

 मूर्ति पूजा से हम लोगों का मन एकाग्रचित होता है। मूर्ति पूजा ध्यान साधना करने की साधारण विधि है। मूर्ति पूजा से हमारा मन शांत होता है। और  इस प्रकार के अनेकों लाभ मिलते हैं। 

धन्यवाद 



रविवार, 19 जुलाई 2020

जुलाई 19, 2020

दिमाग का वजन कितना होता है?

दिमाग का वजन कितना होता है?




आइये जानते हैं दिमाग का वजन कितना होता है (brain ka weight kitna hota hai)। हमारा दिमाग ही है जो हर तरह की प्रॉब्लम को सॉल्व करने की पावर रखता है। शरीर के इस सुपरएक्टिव अंग के बारे में जानना आपके लिए फायदेमंद होने के साथ रोचक भी हो सकता है।

इसलिए क्यों ना, आज हमारे दिमाग के बारे में जानें और जानें मनुष्य के दिमाग का वजन कितना होता है (brain ka weight in hindi)।

Weight of brain ,  what is the weight of our mind
Weight of brain


दिमाग का वजन कितना होता है? (dimag ka wajan kitna hota hai)

  • एक वयस्क के दिमाग का वजन करीब 3 पौंड होता है यानी 1300-1400 ग्राम।
  • दिमाग 75% से ज्यादा पानी का बना होता है।
  • शरीर का सबसे ज्यादा चर्बी वाला अंग दिमाग ही होता है।
  • दिमाग का 40% हिस्सा ग्रे रंग का होता है जबकि बाकी 60% हिस्सा सफेद रंग का होता है।
  • पूरे शरीर का केवल 2 % हिस्सा होते हुए भी हमारा दिमाग पूरे शरीर का 20% ब्लड और ऑक्सीजन अकेले ही इस्तेमाल कर लेता है।
  • दिमाग के लिए ऑक्सीजन इतनी जरुरी हो जाती है कि अगर 5 से 10 मिनट तक इसे ऑक्सीजन ना मिले तो दिमाग डैमेज हो सकता है।
  • एक दिन में हमारे दिमाग में 70 हजार विचार आते हैं जिनमें से 70% विचार नेगेटिव होते हैं।
  • दिमाग में दर्द की कोई नस नहीं होती है इसलिए दिमाग को किसी भी तरह के दर्द का पता नहीं चलता है।
  • हमारा दिमाग 5 साल की उम्र तक 95% बढ़ता है और 18 साल की उम्र तक आते-आते 100% विकसित हो जाता है। इसके बाद दिमाग का बढ़ना रुक जाता है।
  • जागते समय दिमाग 10 वाट की ऊर्जा के बराबर शक्ति प्रदान करता है। ये ऊर्जा बिजली के बल्ब को जला सकती है।
  • दिमाग के सन्देश भेजने की स्पीड 170 मील यानी करीब 272 किमी प्रति घंटा होती है।
  • दिमाग का दाहिना हिस्सा शरीर के बाएं भाग को कण्ट्रोल करता है और दिमाग का बायां हिस्सा शरीर के दाहिने भाग को नियंत्रित करता है।
  • पढ़ाई करने के लिए अगर रात का समय चुना जाए तो ये ज्यादा फायदेमंद होता है। क्योंकि रात के समय दिमाग ज्यादा एक्टिव रहता है।

Thanks you