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मंगलवार, 1 सितंबर 2020

सितंबर 01, 2020

कुंभ और कुंभ का महत्व

   कुंभ और कुंभ का महत्व

 नमस्कार दोस्तों आज किस पोस्ट में हम जानेंगे कि  कुंभ का महत्व क्या है और कुंभ कहां कहां पर लगता है आखिर कुंभ क्या है


कुंभ 


 भारतीय धर्म संस्कृति में कुंभ महत्वपूर्ण पर्व है कुंभ का स्थान पुरातन समय से निर्धारित है देवता और राक्षस द्वारा सामूहिक प्रयास से समुद्र मंथन कार्य संपन्न हुआ था जिसके परिणाम स्वरुप 14 रत्न निकले इस सिम में अमृत कलश भी था।

कुंभ-और-कुंभ-का-महत्व


 अमृत वितरण में विवाद होने पर पक्षीराज गुरु अमृत कलश कुंभ  ले कर चले गए यह मान्यता है कि पक्षीराज गरुड़ ने हरिद्वार , प्रयाग राज , उज्जैन और नासिक में इस अमृत कलश को रखा है जहां जहां भी अमृत कलश रखा गया वहां अमृत की कुछ बूंदें छलकी अमृत  बिंदु सेवा संस्थान पुरवा इन स्थानों पर को का आयोजन होता है सामूहिक सद्भाव सहयोग सजीवन और समरसता विश्व में अद्भुत उदाहरण है । 

सोमवार, 31 अगस्त 2020

अगस्त 31, 2020

हिंदू धर्म में 27 नक्षत्र एवं 18 पुराणों के नाम

  हिंदू धर्म में 27 नक्षत्र एवं 18 पुराणों के नाम



 नमस्कार दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे कि हमारे हिंदू धर्म में कितने नक्षत्र होते हैं और उनके क्या-क्या नाम हैं और साथ ही साथ हम पुराणों के बारे में भी जान लेंगे और समस्त पुराणों के नाम को भी जानेंगे।


 नक्षत्र एवं उनके नाम

 हमारे हिंदू धर्म में ज्योतिष विद्या  का महत्व है जो हमारे ब्रह्मांड की खगोलीय घटनाओं के बारे में बताता है जिसमें नक्षत्र का बहुत बड़ा महत्व होता है। नक्षत्रों की कुल संख्या 27 है जिनके नाम निम्नलिखित हैं-


नक्षत्र
27 नक्षत्र 




 पश्चिम से पूर्व की ओर इनके नाम इस प्रकार हैं


 अश्विनी , भरणी , कृतिका , रोहिणी,  मृगशिरा , आर्द्रा , पुनर्वसु , पुष्य , आश्लेषा , मघा , पूर्वा- फाल्गुनी , उत्तरा-फाल्गुनी , हस्त , चित्रा , स्वाती , विशाखा , अनुराधा , ज्येष्ठा , मूल , पूर्वाखाड़ा ,  उत्तराधिकारी,  धनिष्ठा , शतभिषा , पूर्वाभाद्रपद , उत्तराभाद्रपद ,  और रेवती 

यदि प्रत्येक नक्षत्र को चार चरणों में बांटा गया है उत्तराखाणा के चौथे चरण और श्रवण के पहले 15वें भाग को  अभिजित नक्षत्र कहते  हैं कृतिका नक्षत्र का एक नाम कचवचिया भी है।

पूराण एवं पूराण के नाम 



 हमारे हिंदू धर्म में पूराण  भी अत्यधिक महत्व रखते हैं जो हमारे धर्म के बारे में जानकारी देते हैं और हमें ज्ञान प्रदान करते हैं हमारे हिंदू धर्म में पुराणों की संख्या 18 बताई गई है।


पूराण




 जिसमें श्रीमद्भागवत महापुराण सबसे अधिक महत्व रखता है अन्य पुराण भी अपने अपने जगह पर महत्त्व रखते हैं।


 उनके नाम निम्नलिखित हैं-

 मत्स्य पुराण , मार्कंडेय पुराण , भविष्य पुराण , भागवत महापुराण , ब्रह्मांड पुराण ,:ब्रह्मा वैवर्त पुराण , ब्रह्मा पुराण , वामन पुराण , वाराह पुराण , विष्णु पुराण ,  अग्नि पुराण , पदम पुराण , लिंग पुराण ,  कुर्म पुराण , स्कंद पुराण , नारद पुराण , वायू पूराण और  गरूण पूराण



 आशा दोस्तों आप लोगों को मेरी पोस्ट अच्छी लगी होगी और आपको इससे जरूर कुछ ना कुछ ज्ञान प्राप्त हुआ होगा।



 धन्यवाद

मंगलवार, 21 जुलाई 2020

जुलाई 21, 2020

क्यों हिंदू लगाते हैं तिलक???????

तिलक लगाने का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण 

 दोस्तों आज इस पोस्ट में हम जानेंगे आखिर हम तिलक क्यों लगाते हैं इसका वैज्ञानिक कारण क्या है और धार्मिक रहस्य क्या है इसके साथ  हम यभी जानेंगे कि तिलक कितने प्रकार का होता है किसको तिलक लगाना चाहिए या किसको नहीं लगाना चाहिए




तिलक क्यों लगाएं


 शास्त्रों के अनुसार यदि ब्राह्मण तिलक नहीं लगाता है तो उसे चांडाल समझना चाहिए तिलक धारण करना धार्मिक कार्य माना गया है। 

तिलक क्यों लगाएं।tilak Kyo legate hai



  तिलक के प्रकार और धार्मिक कारण

 तिलक, त्रिपुंड, टीका अथवा  बिंदी आदि का सीधा संबंध मष्तिष्क से  होता है।  मनुष्य की दोनों भौहों के बीच जिस स्थान पर तिलक  लगाते हैं वहाँ आज्ञा चक्र स्थित है इस चक्र पर ध्यान केंद्रित करने पर साधक का मन पूर्ण शक्ति  संपन्न हो जाता है इसे चेतना केंद्र भी कहा जाए जाए तो अनुचित नहीं होगा अर्थात समस्त ज्ञान एवं चेतना का संचालन इसी स्थान से होता है। आज्ञा चक्र ही तृतीय नेत्र है इसे दिव्य नेत्र भी कहते हैं तिलक लगाने से आज्ञा चक्र जागृत होता है ।जिसकी तुलना रडार टेलीस्कोप आदि से की जा सकती है इसके अलावा तिलक सम्मान सूचक भी है तिलक लगाने के से साधु सज्जनता एवं धार्मिकता का आभास होता है।



 तिलक धारण करने का वैज्ञानिक कारण

 जब हम मस्तिष्क से आवश्यकता से अधिक काम लेते हैं तब ज्ञान तंतुओं का विचारक केंद्र भृकुटी और ललाट के मध्य भाग में पीड़ा उत्पन्न हो जाती है ठीक उसी स्थान पर जहां तिलक त्रिपुंड लगाते हैं चंदन का तिलक ज्ञान तंतुओं को शीतलता प्रदान करता है। जो प्रतिदिन प्रातः काल स्थान स्नान के पश्चात चंदन का तिलक लगाता है उसे सिर दर्द का शिकायत नहीं होता इस तथ्य को डॉक्टर से एवं वैध हकीम स्वीकार करते हैं।


 कुमकुम क्या है कुमकुम का तिलक क्यों लगाते हैं

 कुमकुम हल्दी का चूर्ण होता है जिसमें नींबू का रस मिलाने से लाल रंग का हो जाता है। 
तिलक क्यों लगाएं।tilak Kyo legate hai



आयुर्वेद के अनुसार कुमकुम तत्व शोधन  के लिए सर्वोत्तम औषधि है इसका तिलक लगाने से मस्तिष्क तंतु में क्षीणता नहीं आती।



 भस्म का तिलक क्यों लगाते हैं



 भस्म भी  एक तरह से देवताओं का प्रसाद है भोग के लिए देवताओं को चढ़ाया गया मिष्ठान आज तो प्रसाद होता है किंतु  यज्ञ भस्म  ऐसा  प्रसाद है जो खाया नहीं जाता बल्कि भस्म रूपी राख सिर एवं शरीर में पूरी श्रद्धा भक्तों से लगाई जाती है।

तिलक क्यों लगाएं।tilak Kyo legate h




निष्कर्ष 

 दोस्तों ऊपर की पोस्ट की मदद से हमें जाने हैं कि तिलक लगाने से हमारे मस्तिष्क में शांति प्रदान होती है हमारा मन एकाग्र चित्त होता है इसलिए तिलक लगाना आवश्यक होता है और इससे हमारा सम्मान बढ़ता है और हमारी धार्मिक सोभा को भी बढ़ाता है


धन्यवाद 






जुलाई 21, 2020

क्यों हिंदू स्त्रियां लगाती हैं मांग में सिंदूर

 क्यों हिंदू स्त्रियां लगाती हैं मांग में सिंदूर ?


 दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे कि स्त्रियां आखिर क्यों सिंदूर लगाती हैं क्या इसका कोई वैज्ञानिक कारण भी है अगर है तो क्या है


धार्मिक कारण

 मांग में सिंदूर लगाना सुहागिन स्त्रियों का सूचक है। हिंदुओं में विवाहित स्त्रियां ही सिंदूर लगाती हैं।  कुंवारी कन्याओं एवं विधवा स्त्रियों के लिए सिन्दूर लगाना वर्जित है इसके अलावा सुंदर लगने से स्त्रियों के सौंदर्य में भी निखार आता है। अर्थात उनकी सुंदरता बढ़ जाती है।
क्यों हिंदू स्त्रियां लगाती हैं मांग में सिंदूर ?। striyan sindoor Kyo lagati hai



  विवाह संस्कार के समय पर दूल्हा दुल्हन के मस्तक में मंत्रोच्चार के मध्य 5 अथवा 7 बार चुटकी सिंदूर लगाता है तत्पश्चात विभाग कार्य संपन्न हो जाता है। उस दिन से वह स्त्री अपने पति की दीर्घायु लंबी आयु के लिए प्रतिदिन सिंदूर लगाती हैं मांग में दमकता सिंदूर स्त्रियों के श्रृंगार का प्रमुख अंग है।



 सिंदूर लगाना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी आवश्यक है अथवा या केवल   रूढ़िवादिता है।  

 ब्रह्मरन्ध्र और अध्मि नामक मर्म स्थान के ठीक ऊपर स्त्रियां सिंदूर लगाती हैं ; जिसे सामान्य भाषा में सीमांत अथवा मांग कहते हैं। 

क्यों हिंदू स्त्रियां लगाती हैं मांग में सिंदूर ?। sintific reason of using sindoor


पुरुषों की अपेक्षा इस स्त्रियों का यह भाग अपेक्षाकृत कोमल होता है क्योंकि सिन्दूर में पारा जैसी धातु अधिक पाई जाती है जो स्त्रियों के शरीर की विद्युत ऊर्जा को नियंत्रित करती है।  तथा मर्म स्थान को बाहरी दुष्प्रभावों से बचाती भी है अतः वैज्ञानिक दृष्टि से भी स्त्रियों को सिंदूर लगाना आवश्यक है


धन्यवाद 

सोमवार, 20 जुलाई 2020

जुलाई 20, 2020

मूर्ति पूजा क्यों करें ?murti puja Kyo kare

 मूर्ति पूजा क्यों करें ? मूर्ति पूजा से क्या लाभ है?

 आज के इस पोस्ट में हम  यह देखेंगे कि मूर्ति पूजा करना आवश्यक है या नही; अथवा उससे क्या लाभ है


मूर्ति पूजा क्यों करें?

 उपासना मे पंचम श्रेणी  की मूर्तिपूजा है। मनुष्य का मन इधर-उधर भटकता रहता है चाह कर भी लोग अपने मन की चंचलता को नहीं रोक पाते।  मन की चंचलता को रोकने का एकमात्र साधन है मूर्ति पूजा।
मूर्ति पूजा क्यों करें ? मूर्ति पूजा से क्या लाभ है?murti puja Kyo kare, मूर्ति पूजा की आवश्यकता
मूर्ति पूजा की आवश्यकता 


 चंचल मन यदि बिना मूर्ति पूजा की स्थिर नहीं हो पा रहा है; तब मूर्ति पूजा के अतिरिक्त अन्य कोई साधन नहीं है ।मूर्ति पर दृष्टि रखने से उस मूर्ति के प्रति भावना जागृत होती है। और यह भावना ही मन की चंचलता को केंद्रित करती है।मूर्ति पूजा का प्रचलन सनातन हिंदू धर्म में ही नहीं बल्कि अन्य धर्म के लोगों में भी है।  सीख लो गुरु ग्रंथ साहिब की पूजा करते हैं इसाई क्रास कि और मुसलमान लोग कुरान शरीफ  को चुमते हैं। महाभारत काल  के प्रमाण एकलव्य ने द्रोणाचार्य को गुरु माना जबकि द्रोणाचार्य एकलव्य को शिष्य  रूप में स्वीकार  करने से मना कर दिया फिर भी एकलव्य ने उन्हें गुरु मानकर उनकी मिट्टी की प्रतिमा बनाकर बाण विद्या सीखा था इस भावना को भरने के लिए मूर्ति पूजा आवश्यक है।

मूर्ति पूजा से क्या लाभ? 

 मूर्ति पूजा से हम लोगों का मन एकाग्रचित होता है। मूर्ति पूजा ध्यान साधना करने की साधारण विधि है। मूर्ति पूजा से हमारा मन शांत होता है। और  इस प्रकार के अनेकों लाभ मिलते हैं। 

धन्यवाद