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शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

जुलाई 24, 2020

Mobile tower radiation का पंछियों पर प्रभाव


Mobile tower radiation का पंछियों पर प्रभाव 

इस पोस्ट मे हम जानेंगे कि पंछियों पर mobile tower radiation क्या प्रभाव पड़ता है।

Mobile Tower radiation का प्रभाव 

 मोबाइल फोन का व्यापक उपयोग मानव स्वास्थ्य पर संभावित प्रतिकूल प्रभाव के बारे में सार्वजनिक बहस के साथ किया गया है। बहुत कम लोगों को दीर्घकालिक जोखिम के प्रभाव के बारे में पता है जो पक्षियों और अन्य असहाय प्राणी द्वारा मोबाइल फोन बेस स्टेशनों के पास रहने का अनुभव है।
Effect_of_mobile_tower_radiation_on_birds



Orienthlogist  का दावा है कि कभी भी स्पैरो कबूतर या किसी पक्षी को सेल टॉवर के पास रहने पर उड़ते हुए नहीं देखा जाएगा। एक शब्द के बड़े सतह क्षेत्र के लिए विद्युत चुम्बकीय विकिरण के अवशोषण में वृद्धि का कारण मानव शरीर की तुलना है क्योंकि तरल पदार्थ के बाद से बिजली शक्ति घनत्व क्षेत्र कम वजन के कारण यह बहुत तेजी से गर्म हो जाता है और साथ ही चुंबकीय क्षेत्र भी नेविगेशन कौशल को बिगाड़ देता है जब पक्षियों को सप्ताह के चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में लाया जाता है। वे भटकाव करते हैं और सभी दिशाओं में उड़ना शुरू करते हैं जो प्रवासी पक्षियों को नौवहन क्षमताओं को कम करके समझाते हैं।

 दूरसंचार मास्टरों के साथ टक्कर से हर साल लाखों प्रवासी पक्षी मर जाते हैं।

 हाल के दशकों के दौरान वहाँ गौरैया की आबादी में उल्लेखनीय गिरावट आई है। लंदन में गौरैया की 75% पाल की जनसंख्या में भारी गिरावट देखी गई है, एक प्रयोग में 75% चिकन भ्रूण हैं जो टैक्सी के दौरान एक जीएसएम मोबाइल फोन के संपर्क में थे। 16% जो किसी भी विकिरण के संपर्क में नहीं थे, अगले वर्ष टावर्स के पास विनियमित हैच में विफल हो जाते हैं। मोबाइल टेलिकम्यूनिकेशन बेस स्टेशन के पास केस्टेल, सफेद सारस रॉक कबूतर कबूतर जैसे पक्षियों का एक सामान्य लापता देखा गया है।

पक्षियों को सेल फोन विकिरण प्रभाव पर नहीं, लेकिन वे भी मानव गतिविधि का प्रभाव। विश्व स्वास्थ्य संगठन w.h.o. लंबे समय से और सेल फोन के उपयोग से मस्तिष्क कैंसर के बढ़ते जोखिम के कारण एक संभावित मानव कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत सेल फोन विकिरण अनुसंधान दिखा रहा है कि यह आपकी मस्तिष्क की गतिविधि को बदल सकता है जिस तरह से हम अभी तक समझ नहीं पाते हैं।


धन्यवाद 

बुधवार, 22 जुलाई 2020

जुलाई 22, 2020

हिंदी के बारे मे 18 रोचक तथ्य

 हिंदी के कुछ रोचक तथ्य



 इस पोस्ट में हम  हिंदी के कुछ रोचक तथ्यों के बारे में जानेंगे जो तथ्य आप सब लोग को जानना अत्यंत आवश्यक है


हिंदी 

 हिंदी न केवल भारत में बल्कि दुनिया के कई देशों में भी बोली जाती है और दुनिया में अपना एक अलग स्थान रखती है। आज हिंदी किस तरह अपनी पहचान बना चुकी है इसका ताजा उदाहरण हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल ही में गए US यात्रा से लगाया जा सकता है जहां प्रधानमंत्री मोदी ने फेसबुक की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में हिंदी में ही वार्ता किया जबकि उस कार्यक्रम के फेसबुक के CEO मार्क जुकरबर्ग ने इंग्लिश मे host किया। इस तरह मोदी जी ने हिंदी में वार्तालाप करने को एक अलग मुकाम तक पहुंचा दिया यह हम हिंदी भाषियों के लिए proud moment मे से 1 में से एक है हिंदी को लेकर कुछ ऐसे ही तथ्य जो उसे उसे अद्भुत बनाते हैं जिन्हें नीचे दिया गया है।


हिंदी के कुछ रोचक तथ्य 


 1)  पूरे विश्व में 500 मिलियन से भी ज्यादा लोग हिंदी बोल और समझ सकते हैं जो इसे विश्व की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक बनाता है।

2) हिंदी 40% से ज्यादा भारतीयों  की मातृभाषा है भारत में आज के समय बोली जाने वाली हिंदी को मॉडर्न स्टैंडर्ड स्टैंडर्ड हिंदी या मानक हिंदी कहते हैं।

3)  हिंदी भारत की 7 भाषाओं में से एक है जिसे web address  बनाया जा सकता है

4) केवल भारत ही नहीं हिंदी मारीशस, नेपाली, नीड टू बेगू आंटी जी आदि देशों में बड़ी संख्या में बोली जाती है

 5) भारतीय संविधान में 14 सितंबर 1949 को हिंदी की देवनागरी लिपि को अधिकारिक तौर पर मान्यता प्रदान की गई इसलिए 14 सितंबर को हर साल हिंदी दिवस भी मनाया जाता है।

6)  1881 में बिहार ने उर्दू को छोड़ हिंदी को अपनी एकमात्र ऑफिशियल लैंग्वेज बना लिया था ऐसा करने वाला भारत का यह पहला राज्य था

7)  हिंदी शब्द को पर्शियन भाषा के साथ हिंद से लिया गया है

8)  देश में हर पांच में से एक व्यक्ति  इंटरनेट को हिंदी में चलाना पसंद करता है।

9)  हिंदी के बारे में 1 रोचक तथ्य यह भी है कि हिंदी मूल्यतः फारसी भाषा का शब्द है।


10)  हिंदी व्याकरण में कोई आर्टिकल नहीं है जैसे  अंग्रेजी में the, a और an

 11) 36000000 लोगों के लिए हिंदी मातृभाषा है वहीं  इस भाषा को कुल 487000000 लोग उपयोग करते हैं। 


12)  देवकीनंदन खत्री द्वारा वर्ष 1988 में लिखे गए चंद्रकांता को आधुनिक हिंदी का पहला आर्थेन्टिक  वर्क कहा जाता है।

13)  हिंदी की पहली कविता प्रख्यात कवि अमीर खुसरो ने लिखी थी।

14)   1977 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को हिंदी में संबोधित किया।

15) नमस्ते शब्द हिंदी भाषा का सबसे ज्यादा प्रयोग किए जाने वाला शब्द है।

16)  आज भी यूनाइटेड स्टेट अमेरिका के 45 विश्वविद्यालय सहित पूरे विश्व के लोग लगभग 176 विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है।

17)   गूगल ने कहा है कि इंटरनेट पर हिंदी कंटेंट की खपत बढ़ना शुरू हो गई है यह साल दर साल इंग्लिश कंटेंट के 19%  ग्रोथ के मुकाबले 94% बढ़ती जा रही है।


 18 )  हिंदी के को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले हिंदी अखबार ही हैं उन्होंने अंग्रेजी अरबी और फारसी भाषा के शब्दों को जानबूझकर अखबारों में घुसाकर प्रचलन मे ला दिया है।


धन्यवाद 



जुलाई 22, 2020

मानव जाति मे हारमोंस का प्रभाव। effect of hormones on human

 मानव जाति में हारमोंस का प्रभाव

 दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे कि हारमोंस हमारे शरीर के लिए लाभदायक है या नहीं अथवा क्या कोई रोग भी हो सकता है हार्मोन की कमी से या हारमोंस के अधिक होने से और कौन सा हारमोंस  अच्छा है या बुरा है।

हारमोंस का मानव जीवन और स्वास्थ्य पर प्रभाव 

 नियमित व्यायाम शरीर और मन मानसिक सेहत के लिए अच्छा होता है एक अध्ययन के द्वारा यह पाया गया कि ओपन ऑफिस में बैठने वाले केबिन में बैठने वालों से ज्यादा सक्रिय होते हैं।

हारमोंस का प्रभाव। effects of harmones

 तनाव किसी के लिए भी ठीक नहीं है एक अध्ययन के मुताबिक तनाव होने पर शरीर के कार्टीसाल हार्मोन का प्रभाव बढ़ता है इस हारमोंस का नकारात्मक प्रभाव गर्भ में पल रही बेटी पर बेटों की तुलना में ज्यादा पड़ता है कार्टीसाल हार्मोन के कारण जन्म के बाद 2 साल की उम्र में ही बेटियां में anxiety  और अवसाद के लक्षण नजर आने लगते हैं। यह तथ्य बायोलॉजिकल साइकैट्री नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।



 यदि नियमित रूप से सप्ताह में दो या तीन बार एरोबिक व्यायाम कर लिए जाएं तो सिजनोफ्रेनिया जैसी बीमारियों के लक्षणों को कम किया जा सकता है।  इन कार्यों से मानसिक बीमारियां का सामना करने वाले लोगों में भी बीमारियां के विरुद्ध लड़ने की क्षमता का विकास होता है।




 क्या तनाव से बढ़ता है कैंसर का खतरा


 तनाव को सीधे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह व मानसिक रोगों से जोड़ा जाता है। हाल ही में नए शोध के नतीजे चौंकाने वाले हैं इनमें तनाव के साथ ही नकारात्मक सोच को कैंसर जैसी जानलेवा रोग की वजह बताया जा रहा है।

हारमोंस का प्रभाव|effect of hormones|cancer


 तनाव के शिकार बने रहने वाले व्यक्ति के शरीर में खराब हारमोंस जैसे कार्टीसाल के दुष्प्रभाव से कुछ रसायन जैसे ए एड्रीनलीन  की कमी शरीर की कोशिकाओं को नष्ट कर देती है जो दिमाग के भावनात्मक सेंटर को नुकसान पहुंचाता है। इससे शरीर के विभिन्न अंगों को गलत संदेश मिलता है और कैंसर जैसी टेढ़ी-मेढ़ी कोशिकाएं बनती हैं। शरीर में मौजूद नेचुरल सेल्स इन खराब कोशिकाओं को नष्ट नहीं कर पाती जिससे व्यक्ति कमजोर पड़ जाता है अतः शरीर में लंबे समय के पश्चात एड्रीनलिन का स्त्राव बंद हो जाता है।




 क्या हारमोंस  से तय होता है इंसान का स्वभाव

हाँ,  दोस्तों हमार स्वभाव  हारमोंस पे निर्भर करता है आइए आगे पढ़ते है 


 हारमोंस के कारण मनुष्य की मानसिक प्रकृति में परिवर्तन आता है हारमोंस न सिर्फ शारीरिक विकास परंतु उसके मस्तिष्क भावनाओं व व्यवहार को भी प्रभावित करता है। हर व्यक्ति में हारमोंस का स्तर अलग अलग होता है अतः इसके द्वारा ही मानव का स्वभाव तय होता है जैसे गुस्सा होना, एकाग्रता, मानसिक योग्यता, धैर्यता, उत्तेजन-शीलता स्थिरता इत्यादि।

 दो अलग-अलग लोगों का एक दूसरे के प्रति आकर्षण प्रतिकर्षण की भावना का विकास भी हारमोंस  पर निर्भर करता है इस क्रिया में ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्त्राव और अत्यधिक होता है जिसे कारण व्यक्ति  दूसरे से जल्द ही आकर्षित हो जाता है।

 हारमोंस का असंतुलन कई बार परेशानी का कारण बन जाता है जैसे भी सामाजिक अपराधिक समस्याएं, एसिड अटैक, अनियंत्रित उत्तेजना द्वारा मर्डर, रेप केस इत्यादि इसका जीवंत उदाहरण है।

 माइग्रेन से पीड़ित महिलाओं के लिए हार्मोन थेरेपी सुरक्षित है या नहीं


 माइग्रेन अलग-अलग तीव्रता का सिर दर्द है। जिससे पीड़ित महिलाओं को अक्सर मितली प्रकाश व ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता की शिकायत रहती है।

मानव जाति मे हारमोंस का प्रभाव | effects of harmones



 एकसोजीनस एस्ट्रोजन को एक साथ उपयोग और माइग्रेन पीड़ित महिलाओं में सिरदर्द व मितली का खतरा बढ़ने के कारण माइग्रेन से ग्रस्त महिलाओं में हार्मोन थेरेपी कारगर साबित हो रही है।

  हमारे जीवन प्रत्याशा में मानवीय  दर में वृद्धि हो रही है सोसाइटी की समस्याएं हल करना कभी-कभी ऐसा लगता है कि तकनीक केवल समस्याओं का कारण बनती जा रही है या चीजों को जटिल बना रही है परंतु ऐसा नहीं है। एक साधारण  जीवन के लिए उत्सुक हैं बिना सेलफोन ट्रैफिक जाम और खतरनाक हथियार से जीवन असंभव सा हो गया है लेकिन सच्चाई यह है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में समाज की कई समस्याओं को हल भी किया है और भविष्य में ऐसा जारी रहेगा पिछले 200 वर्ष में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने पूरी दुनिया को बदल दिया है आज हम सभी प्रकार के चीजों से घिरे हुए हैं जो एक शताब्दी पहले अकल्पनीय थी जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की बिना असंभव है।


धन्यवाद 




मंगलवार, 21 जुलाई 2020

जुलाई 21, 2020

क्यों हिंदू लगाते हैं तिलक???????

तिलक लगाने का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण 

 दोस्तों आज इस पोस्ट में हम जानेंगे आखिर हम तिलक क्यों लगाते हैं इसका वैज्ञानिक कारण क्या है और धार्मिक रहस्य क्या है इसके साथ  हम यभी जानेंगे कि तिलक कितने प्रकार का होता है किसको तिलक लगाना चाहिए या किसको नहीं लगाना चाहिए




तिलक क्यों लगाएं


 शास्त्रों के अनुसार यदि ब्राह्मण तिलक नहीं लगाता है तो उसे चांडाल समझना चाहिए तिलक धारण करना धार्मिक कार्य माना गया है। 

तिलक क्यों लगाएं।tilak Kyo legate hai



  तिलक के प्रकार और धार्मिक कारण

 तिलक, त्रिपुंड, टीका अथवा  बिंदी आदि का सीधा संबंध मष्तिष्क से  होता है।  मनुष्य की दोनों भौहों के बीच जिस स्थान पर तिलक  लगाते हैं वहाँ आज्ञा चक्र स्थित है इस चक्र पर ध्यान केंद्रित करने पर साधक का मन पूर्ण शक्ति  संपन्न हो जाता है इसे चेतना केंद्र भी कहा जाए जाए तो अनुचित नहीं होगा अर्थात समस्त ज्ञान एवं चेतना का संचालन इसी स्थान से होता है। आज्ञा चक्र ही तृतीय नेत्र है इसे दिव्य नेत्र भी कहते हैं तिलक लगाने से आज्ञा चक्र जागृत होता है ।जिसकी तुलना रडार टेलीस्कोप आदि से की जा सकती है इसके अलावा तिलक सम्मान सूचक भी है तिलक लगाने के से साधु सज्जनता एवं धार्मिकता का आभास होता है।



 तिलक धारण करने का वैज्ञानिक कारण

 जब हम मस्तिष्क से आवश्यकता से अधिक काम लेते हैं तब ज्ञान तंतुओं का विचारक केंद्र भृकुटी और ललाट के मध्य भाग में पीड़ा उत्पन्न हो जाती है ठीक उसी स्थान पर जहां तिलक त्रिपुंड लगाते हैं चंदन का तिलक ज्ञान तंतुओं को शीतलता प्रदान करता है। जो प्रतिदिन प्रातः काल स्थान स्नान के पश्चात चंदन का तिलक लगाता है उसे सिर दर्द का शिकायत नहीं होता इस तथ्य को डॉक्टर से एवं वैध हकीम स्वीकार करते हैं।


 कुमकुम क्या है कुमकुम का तिलक क्यों लगाते हैं

 कुमकुम हल्दी का चूर्ण होता है जिसमें नींबू का रस मिलाने से लाल रंग का हो जाता है। 
तिलक क्यों लगाएं।tilak Kyo legate hai



आयुर्वेद के अनुसार कुमकुम तत्व शोधन  के लिए सर्वोत्तम औषधि है इसका तिलक लगाने से मस्तिष्क तंतु में क्षीणता नहीं आती।



 भस्म का तिलक क्यों लगाते हैं



 भस्म भी  एक तरह से देवताओं का प्रसाद है भोग के लिए देवताओं को चढ़ाया गया मिष्ठान आज तो प्रसाद होता है किंतु  यज्ञ भस्म  ऐसा  प्रसाद है जो खाया नहीं जाता बल्कि भस्म रूपी राख सिर एवं शरीर में पूरी श्रद्धा भक्तों से लगाई जाती है।

तिलक क्यों लगाएं।tilak Kyo legate h




निष्कर्ष 

 दोस्तों ऊपर की पोस्ट की मदद से हमें जाने हैं कि तिलक लगाने से हमारे मस्तिष्क में शांति प्रदान होती है हमारा मन एकाग्र चित्त होता है इसलिए तिलक लगाना आवश्यक होता है और इससे हमारा सम्मान बढ़ता है और हमारी धार्मिक सोभा को भी बढ़ाता है


धन्यवाद 






जुलाई 21, 2020

क्यों हिंदू स्त्रियां लगाती हैं मांग में सिंदूर

 क्यों हिंदू स्त्रियां लगाती हैं मांग में सिंदूर ?


 दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे कि स्त्रियां आखिर क्यों सिंदूर लगाती हैं क्या इसका कोई वैज्ञानिक कारण भी है अगर है तो क्या है


धार्मिक कारण

 मांग में सिंदूर लगाना सुहागिन स्त्रियों का सूचक है। हिंदुओं में विवाहित स्त्रियां ही सिंदूर लगाती हैं।  कुंवारी कन्याओं एवं विधवा स्त्रियों के लिए सिन्दूर लगाना वर्जित है इसके अलावा सुंदर लगने से स्त्रियों के सौंदर्य में भी निखार आता है। अर्थात उनकी सुंदरता बढ़ जाती है।
क्यों हिंदू स्त्रियां लगाती हैं मांग में सिंदूर ?। striyan sindoor Kyo lagati hai



  विवाह संस्कार के समय पर दूल्हा दुल्हन के मस्तक में मंत्रोच्चार के मध्य 5 अथवा 7 बार चुटकी सिंदूर लगाता है तत्पश्चात विभाग कार्य संपन्न हो जाता है। उस दिन से वह स्त्री अपने पति की दीर्घायु लंबी आयु के लिए प्रतिदिन सिंदूर लगाती हैं मांग में दमकता सिंदूर स्त्रियों के श्रृंगार का प्रमुख अंग है।



 सिंदूर लगाना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी आवश्यक है अथवा या केवल   रूढ़िवादिता है।  

 ब्रह्मरन्ध्र और अध्मि नामक मर्म स्थान के ठीक ऊपर स्त्रियां सिंदूर लगाती हैं ; जिसे सामान्य भाषा में सीमांत अथवा मांग कहते हैं। 

क्यों हिंदू स्त्रियां लगाती हैं मांग में सिंदूर ?। sintific reason of using sindoor


पुरुषों की अपेक्षा इस स्त्रियों का यह भाग अपेक्षाकृत कोमल होता है क्योंकि सिन्दूर में पारा जैसी धातु अधिक पाई जाती है जो स्त्रियों के शरीर की विद्युत ऊर्जा को नियंत्रित करती है।  तथा मर्म स्थान को बाहरी दुष्प्रभावों से बचाती भी है अतः वैज्ञानिक दृष्टि से भी स्त्रियों को सिंदूर लगाना आवश्यक है


धन्यवाद 

सोमवार, 20 जुलाई 2020

जुलाई 20, 2020

महर्षि चरक की जीवनी और चरक संघिता

  आयुर्वेद, आयुर्वेद के महर्षि चरक एवं चरक संहिता

 दोस्तों हम इस पोस्ट में आयुर्वेद महान आयुर्वेदिक महर्षि चरक चरक संहिता के बारे में जानेंगे

आयुर्वेद 

आयुर्वेद अथर्ववेद का एक उपवेद है।  यह मात्र चिकित्सा विज्ञान का शास्त्र नहीं है। आयुर्वेद के आदि प्रवर्तक तो अमृत कलश धारी भगवान धन्वंतरी माने जाते हैं;  परंतु आयुर्वेद शास्त्र का जो ज्ञान वर्तमान में उपलब्ध है, उसके आधारभूत ग्रंथ दो ही हैं- 1, चरक संघिता और 2,  सुश्रुत संहिता ।  चरक का प्रादुर्भाव आचार्य सुश्रुत से पहले हुआ था ऐसा सर्वमान्य है।  इनकी एकमात्र ग्रंथ  का नाम है 'चरक संघिता'। 
चरक की जीवनी और चरक संघिता। आयुर्वेद ज्ञान
चरक के बारे मे

चरक शब्द का अर्थ 

 आयुर्वेद के आचार्य चरक पर विचार करने के पहले चरक शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई इसकी जानकारी होना आवश्यक है ऋग्वेद मे एक सूक्त  ही है 'चरैवेति चरैवेति'।  चलते रहो ,चलते रहो ।  सर्वप्रथम चरक का अर्थ था भ्रमण सील विद्वान या विद्यार्थी।  बृहदारण्यक उपनिषद में इसका उपयोग इसी अर्थ में हुआ है ।  इस नाम (चरक) से विशेषता या कृष्ण यजुर्वेद की एक शाखा का बोध होता है कृष्ण यजुर्वेद की शाखाओं में अकेले चरक संप्रदाय की ही 12 शाखाएं थी ।  चरक शाखा के पहले तीन भागों के नाम ईथिमिका मध्यमिक और अरिमिका है ।  वैशम्पायन ऋषी के अंतेवासी भी चरक कहलाते थे। वैशम्पायन ऋषी का संबंध कृष्ण यजुर्वेद से हैं।  और उनके संबंधित एक शाखा का नाम भी चरक हैं।  इस प्रकार स्पष्ट है कि आयुर्वेद में चरक शब्द का अर्थ  बृहदारण्यक उपनिषद की परंपरा से  ग्रहण किया गया है । 

चरक की उत्पत्ति मे मतभेद 

 कुछ विद्वान चरक को कुषाण वंश के सम्राट कनिष्ठ के समय का बतलाते हैं परंतु यह मत सर्वथा अनुचित है इसकी पुष्टि कहीं भी नहीं हुई है।

चरक संघिता 

 चरक संघिता कृष्ण यजुर्वेद की परंपरा में होने से उसी की तरह गद्य और पद्य में है। इसमें अग्नि पुराण के बहुत से श्लोक  मिलते हैं तथा आचार्य कौटिल्य के अर्थशास्त्र की भांति भिन्न-भिन्न आचार्यों के मत को दिखाकर आत्रेय ने अपने मत को स्थापित किया है । इसकी भाषा शैली भी बहुत कुछ अर्थशास्त्र से मिलती जुलती है वास्तव में चरक संघिता महर्षि पुनर्वसु द्वारा उपदेश की हुई उनके शिष्य अग्निवेश द्वारा बनाई गई चरक  द्वारा प्रति संस्कार की गई है

चरक की जीवनी और चरक संघिता। आयुर्वेद ज्ञान
चरक संघिता 


 आखिर चरक संहिता में है क्या इसकी आयुर्वेद संबंधी विषय वस्तु क्या है?  ऐसे प्रश्न उठना उपर्युक्त वर्णन के संदर्भ में सहज स्वाभाविक है।  आयुर्वेद किस आधारभूत ज्ञान ग्रंथ का क्षेत्र काय- चिकित्सा तथा सीमित है। इसलिए जहां पर भी दूसरे शास्त्र से संबंधित विषय आता है,  वहां पर या तो उस शास्त्र के  ज्ञाता से सहायता लेने का निर्देश दिया गया है अथवा विषय वस्तु का संक्षेप में प्रतिपादन किया गया है।

 चरक संघिता में जितने ऋषि यों का उल्लेख मिलता है उतना अन्य किसी भी आयुर्वेद ग्रंथ में नहीं मिलता।  यथा -जमदग्नि, वशिष्ठ, भृगु,  अगस्त्य आदि कुछ  ॠषी के नाम नए हैं। यथा वडिस शरलोमा,  काप्य, कैकशैय , हिरण्याक्ष ।  भारद्वाज के साथ कुमार सिर विशेषण का प्रयोग किया गया है जो एकदम ने अन्य क्रिया विशेषण नहीं मिलता।


चरक के दर्शन 

 चरक ने प्रकृति और पुरुष को एक स्वीकार कर 24 तत्व  माने हैं। सांख्य दर्शन में पुरुष और प्रकृति को पृथक  मानकर 25 तत्व माने गए हैं। सांख्य  की भांति चरक संघिता मे ईश्वर  का उल्लेख नहीं है । चरक का मत वैश्विक और न्याय से बहुत कुछ मिलता है । चरक  संगीता में पुरुष पुनर्जन्म और रोग की प्रतिष्ठा आत्मा संबंधी प्रश्नों का विचार बहुत ही स्वतंत्र रूप से है। इसके अनुसार अस्तित्व का अर्थ है जो पुनर्जन्म  को माने । चरक में जन्म से जाति की कल्पना नहीं है, अध्ययन एवं क्रम में जांच उत्पन्न होती है इसे ब्राह्मण भोजन का उल्लेख नहीं है।
 चरक संघिता में आहार संबंधी सूचना विवेचन हैं और अन्य पान की विशेष जानकारी दी गई है। 20 25 तरह के तो चावलों का ही उल्लेख है। तथा मान्स , शाक,  फल वर्ग आदि का वर्णन है। फलों में अनार के शिवाय अन्य का उपयोग नहीं है। केला का उपयोग विशेष स्त्री रोग में है।  अंगूर का उपयोग मुख्य रूप में है।  गौरस से बनी हुई दाही तक्र आदि  व गन्ना  का वर्णन भी चरक संघिता में दिया गया है। गुड  शर्करा मोटी मिश्री कालपी या मुल्तानी मिश्री का उल्लेख है मधु के चार प्रकार का वर्णन इसमें है हरित वर्ग में मूली आदि का उल्लेख है।
चरक की जीवनी और चरक संघिता।आयुर्वेद ज्ञान
चरक की जीवनी 


चिकित्सा व्यवस्था 

 चरक संघिता में बैरी तथा अन्य व्यक्तियों के लिए धन की आवश्यकता का उल्लेख है। अर्थात बिना धन के बिना साधन के जीवन बिताना सबसे बड़ा पाप है साधन के लिए धन एकत्र करें इसके लिए सज्जनों से सम्मानित व्यक्तियों का अवलंबन करने को कहा गया है। वेद के लिए धन का इतना महत्व नहीं है जितना मान और यश का चरक संहिता में स्थान स्थान पर वैद्य को मान और यश की रक्षा करने का विधान है। श्रेष्ठ  तथा परिश्रम से किसी और औषद के  सिद्ध होने पर उसका विज्ञापन और सूचना देने का भी उल्लेख है।


वैद्य होने की योग्यता 

 वेद के साथी कैसे होंगे,  इसका भी चरक ने उल्लेख किया है।  यह साथी ऐसे चुनें, जो सहयोगी, कला कुशल , धन-धान्य से संपन्न, परस्पर अनुकूल रहने वाले , सामान प्रकृति ,एक की आयु,   नित्य प्रति काम में संलग्न,  प्रियावादी, समान शील,गुणो से समन्वित हो।



निष्कर्ष

 उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि महर्षि चरक की संघिता आयुर्वेद का आधारभूत ग्रंथ है।  जिसमें इस शास्त्र का सांगोपांग वर्णन है चरक संघिता का सम्यक अध्ययन किए बिना कोई भी आयुर्वेदज्ञ या वैद्य बनने की सामर्थ नहीं रखता।

धन्यवाद 
जुलाई 20, 2020

मूर्ति पूजा क्यों करें ?murti puja Kyo kare

 मूर्ति पूजा क्यों करें ? मूर्ति पूजा से क्या लाभ है?

 आज के इस पोस्ट में हम  यह देखेंगे कि मूर्ति पूजा करना आवश्यक है या नही; अथवा उससे क्या लाभ है


मूर्ति पूजा क्यों करें?

 उपासना मे पंचम श्रेणी  की मूर्तिपूजा है। मनुष्य का मन इधर-उधर भटकता रहता है चाह कर भी लोग अपने मन की चंचलता को नहीं रोक पाते।  मन की चंचलता को रोकने का एकमात्र साधन है मूर्ति पूजा।
मूर्ति पूजा क्यों करें ? मूर्ति पूजा से क्या लाभ है?murti puja Kyo kare, मूर्ति पूजा की आवश्यकता
मूर्ति पूजा की आवश्यकता 


 चंचल मन यदि बिना मूर्ति पूजा की स्थिर नहीं हो पा रहा है; तब मूर्ति पूजा के अतिरिक्त अन्य कोई साधन नहीं है ।मूर्ति पर दृष्टि रखने से उस मूर्ति के प्रति भावना जागृत होती है। और यह भावना ही मन की चंचलता को केंद्रित करती है।मूर्ति पूजा का प्रचलन सनातन हिंदू धर्म में ही नहीं बल्कि अन्य धर्म के लोगों में भी है।  सीख लो गुरु ग्रंथ साहिब की पूजा करते हैं इसाई क्रास कि और मुसलमान लोग कुरान शरीफ  को चुमते हैं। महाभारत काल  के प्रमाण एकलव्य ने द्रोणाचार्य को गुरु माना जबकि द्रोणाचार्य एकलव्य को शिष्य  रूप में स्वीकार  करने से मना कर दिया फिर भी एकलव्य ने उन्हें गुरु मानकर उनकी मिट्टी की प्रतिमा बनाकर बाण विद्या सीखा था इस भावना को भरने के लिए मूर्ति पूजा आवश्यक है।

मूर्ति पूजा से क्या लाभ? 

 मूर्ति पूजा से हम लोगों का मन एकाग्रचित होता है। मूर्ति पूजा ध्यान साधना करने की साधारण विधि है। मूर्ति पूजा से हमारा मन शांत होता है। और  इस प्रकार के अनेकों लाभ मिलते हैं। 

धन्यवाद